सावधान! भारी स्कूल बैग पर शिक्षा विभाग सख्त, स्कूलों को नियम पालन का अल्टीमेटम
बिलासपुर। 01 सितंबर 2026। बच्चों के स्कूल बैग का वजन कम करने को लेकर बिल्हा विकासखंड शिक्षा विभाग ने सख्त कदम उठाया है। बीईओ भूपेंद्र कौशिक ने क्षेत्र के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के प्राचार्यों को निर्देश जारी कर स्कूल बैग पॉलिसी का अनिवार्य रूप से पालन कराने को कहा है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियमों में लापरवाही सामने आने पर स्कूल के संस्था प्रमुख की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
शिकायत के बाद हरकत में आया शिक्षा विभाग
भारी स्कूल बैग को लेकर पिरैया, संकुल सरवानी निवासी अश्वनी साहू ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बच्चों के कंधों और स्वास्थ्य पर भारी बस्ते के असर की चिंता जताई गई थी। इसके बाद शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्कूलों को स्कूल बैग नीति 2020 के प्रावधानों का पालन करने के निर्देश दिए।
रोजाना सभी किताबें लाने की जरूरत नहीं
नए निर्देश के मुताबिक स्कूलों को ऐसा टाइम-टेबल तैयार करना होगा, जिससे बच्चों को हर दिन सभी किताबें और कॉपियां लेकर स्कूल न आना पड़े। प्रत्येक स्कूल में डिजिटल वजन मशीन रखना भी जरूरी होगा। इससे बच्चों के बैग का वजन समय-समय पर जांचा जा सकेगा। विभाग ने चौड़ी पट्टियों वाले बैग इस्तेमाल करने की सलाह दी है, ताकि वजन दोनों कंधों पर समान रूप से रहे। वहीं, सीढ़ियों पर हादसे की आशंका को देखते हुए ट्रॉली बैग पर रोक लगाई गई है।
कक्षा के हिसाब से तय रहेगा बैग का वजन
प्री-प्राइमरी बच्चों के लिए बैग नहीं होना चाहिए। कक्षा 1-2 में बैग का वजन 1.6 से 2.2 किलो, कक्षा 3-5 में 1.7 से 2.5 किलो और कक्षा 6-7 में 2 से 3 किलो तक रखा गया है। कक्षा 8 के लिए यह सीमा 2.5 से 4 किलो, कक्षा 9-10 में 2.5 से 4.5 किलो और कक्षा 11-12 में 3.5 से 5 किलो तक निर्धारित है।
पानी, भोजन और लॉकर की भी व्यवस्था
बच्चों को भारी पानी की बोतल और टिफिन लाने से राहत देने के लिए स्कूलों में पीने का पानी और मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश हैं। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए बुक बैंक और लॉकर की सुविधा देने की बात भी कही गई है। शिक्षा विभाग का उद्देश्य बच्चों को भारी बस्ते से राहत देकर उनके स्वास्थ्य को सुरक्षित रखना है।
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