अयोध्या। 02 सितंबर 2026। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की व्यवस्थाओं को अब एक नए प्रशासनिक ढांचे के तहत संचालित किया जाएगा। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने पहले मुख्य कार्यपालक अधिकारी यानी CEO के नाम का ऐलान कर दिया है। ट्रस्ट ने भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। बुधवार को हुई ट्रस्ट की बैठक में उनके नाम पर अंतिम सहमति बनी।
5585 आवेदनों के बाद तीन नामों का पैनल
राम मंदिर ट्रस्ट ने CEO की नियुक्ति के लिए व्यापक चयन प्रक्रिया अपनाई थी। इस पद के लिए कुल 5585 आवेदन प्राप्त हुए थे। आवेदनों की शुरुआती जांच और मूल्यांकन के बाद योग्य उम्मीदवारों को अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ाया गया। विशेषज्ञ टीमों ने दिल्ली-एनसीआर, पुणे और ओडिशा के संबलपुर में उम्मीदवारों का मूल्यांकन किया।
चयन प्रक्रिया में 600 अंकों का मूल्यांकन फॉर्म तैयार किया गया था। आवेदन करने वालों में से 3570 उम्मीदवारों ने इसकी प्रक्रिया पूरी की। 60 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वालों को अगले चरण के लिए चुना गया। इसके बाद 108 उम्मीदवारों को अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया। ऑनलाइन इंटरव्यू के बाद 17 उम्मीदवारों को आमने-सामने बातचीत के लिए बुलाया गया, जिनमें 16 उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया।
सर्च कमेटी ने ट्रस्ट को सौंपा तीन नामों का पैनल
CEO के चयन के लिए गठित सर्च कमेटी ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और योग्यता आधारित रखने पर जोर दिया। कमेटी ने अंतिम चरण में तीन नामों का पैनल तैयार कर ट्रस्ट को सौंपा। इसके बाद ट्रस्ट की बैठक में सभी पहलुओं पर विचार किया गया और एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नाम पर मुहर लगाई गई।
यह बैठक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के आवास मणिरामदास छावनी में हुई। ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों और आमंत्रित सदस्यों की मौजूदगी में नियुक्ति को अंतिम रूप दिया गया।
मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था संभालेंगे CEO
जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति के बाद राम मंदिर से जुड़ी प्रशासनिक और प्रबंधन संबंधी जिम्मेदारियों को एक केंद्रीकृत व्यवस्था के तहत संचालित करने में मदद मिलेगी। ट्रस्ट के सचिव के निर्देशों के अनुरूप CEO मंदिर की विभिन्न व्यवस्थाओं और गतिविधियों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
मंदिर की बढ़ती गतिविधियों, श्रद्धालुओं की संख्या और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को देखते हुए ट्रस्ट ने CEO नियुक्त करने का निर्णय लिया था। नई व्यवस्था का उद्देश्य मंदिर से जुड़े कामकाज में बेहतर समन्वय और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।
38 साल से ज्यादा का सैन्य अनुभव
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के अनुभवी अधिकारी रहे हैं। उन्होंने वर्ष 1986 में वायुसेना में कमीशन प्राप्त किया था। अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान उन्होंने फाइटर पायलट और टेस्ट पायलट के रूप में काम किया और 3000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव हासिल किया।
उन्होंने वायुसेना के पश्चिमी एयर कमांड की कमान भी संभाली। करीब 38 वर्षों से अधिक की सैन्य सेवा के बाद वे 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्त हुए। सैन्य क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें विशिष्ट सेवा पदक और अन्य महत्वपूर्ण सम्मान मिल चुके हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी निभाई अहम भूमिका
जितेंद्र मिश्रा का नाम हाल के वर्षों में सैन्य अभियानों और रणनीतिक जिम्मेदारियों को लेकर भी चर्चा में रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन्होंने पश्चिमी क्षेत्र में वायुसेना की कमान संभाली थी। सैन्य सेवा के दौरान उनके नेतृत्व और योगदान को देखते हुए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से भी सम्मानित किया गया।
इसके अलावा उन्होंने वायुसेना में परिचालन योजना और मूल्यांकन से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। HAL में रहते हुए Su-30 MKI में ब्रह्मोस मिसाइल को एकीकृत करने जैसे चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट में भी उनकी भूमिका बताई जाती है।
राम मंदिर ट्रस्ट में तीन नए सदस्य भी नियुक्त
CEO की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट ने तीन नए सदस्यों को शामिल करने की भी घोषणा की है। इनमें अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडे, दिल्ली के महेश भागचंदका और अयोध्या की निर्मला यादव शामिल हैं।
जितेंद्र मिश्रा के सामने अब मंदिर की विशाल प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित करने की जिम्मेदारी होगी। सैन्य क्षेत्र में लंबे अनुभव के बाद अब उनकी नई भूमिका अयोध्या के राम मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं में दिखाई देगी।

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